Sunday, 8 March 2015
Sunday, 10 August 2014
मोती फूलों पर टपकाये
मोती फूलों पर टपकाये
मेरे भाई सत्यम के ब्लॉग बाल झरोखा सत्यम की दुनिया से लिया गया मोती फूलों पर टपकाये
मोती फूलों पर टपकाये
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काले भूरे बादल गरजे
चपला चमक चमक के डराये
छर छर हर हर जोर की बारिश
पलभर भैया नदी बनाये
गली मुहल्ले नाले-नदिया
देख देख मन खुश हो जाये
झमझम रिमझिम बूँदे बारिश
मोती फूलों पर टपकाये
सतरंगी क्यारी फूलों की
बच्चों सा मुस्कायें महकें
वर्षा ज्यों ही थम जाती तो
बन्दर टोली बच्चे आयें
खेलें कूदें शोर मचायें
कोई कागज नाव चलायें
फुर्र फुर्र छोटी चिड़ियाँ तो
उड़ उड़ पर्वत पेड़ पे जायें
व्यास नदी शीतल दरिया में
जल क्रीड़ा कर खूब नहायें
मेरी काँच की खिड़की आतीं
छवि देखे खूब चोंच लड़ाये
मैं अन्दर से उनको पकड़ूँ
अजब गजब वे खेल खिलायें
बहुत मनोहर शीतल शीतल
मलयानिल ज्यों दिन भर चलती
कुल्लू और मनाली अपनी
देवभूममि सच प्यारी लगती
झर-झर झरने देवदार हैं चीड़ यहाँ तो
हिम हिमगिरि हैं बरफ लगे चाँदी के जैसे
हे प्रभु कुदरत तेरी माया, रचना रची है कैसे कैसे
मन पूजे तुझको शक्ति को, सदा बसो मन मेरे ऐसे
सुरेंद्र कुमार शुक्ल भ्रमर
5.30 am – 5.54 am
भुट्टी कालोनी, कुल्लू (HP)
बच्चे मन के सच्चे हैं फूलों जैसे अच्छे हैं मेरी मम्मा कहती हैं तुझसे जितने बच्चे हैं सब अम्मा के प्यारे हैं --
Tuesday, 18 February 2014
चिराग
एक चिराग की खातिर
मन्दिर -मस्जिद दिया -दिया
और आज उसी चिराग ने
खेल-खेल घर ही जला दिया
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सुरेन्द्र शुक्ल भ्रमर
करतारपुर जल पी बी
५.२.२०१४
मन्दिर -मस्जिद दिया -दिया
और आज उसी चिराग ने
खेल-खेल घर ही जला दिया
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सुरेन्द्र शुक्ल भ्रमर
करतारपुर जल पी बी
५.२.२०१४
Thursday, 15 August 2013
अनेकता में एकता --अपना भारत
प्रिय दोस्तों और ..मेरे नन्हे मुन्ने मित्रों आप सब को भ्रमर की तरफ से स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभ कामनाएं ...
मेरा भारत महान है , हम सब की शान है अपनी जान हैं गौरव है यह एक शब्द नहीं है अपितु हर भारतवासी के दिल की धड़कन है। ये अपनी पहचान है। हम इस पवित्र भूमि में पैदा हुए हैं। हमारे लिए यह उतना ही महत्त्वपूर्ण है जितना कि हमारे माता-पिता हम सब के लिए । भारत केवल एक भू-भाग का नाम नहीं है बल्कि यह हो इस भू-भाग में बसे लोगों, उसकी संस्कृति, उसकी सभ्यता, और उसके रीति-रिवाजों, तथा इस के अमूल्य और अमर इतिहास का नाम है। भारत के भौगोलिक रूप की बात अगर हम करें तो यह एक विशाल देश है जिसके उत्तर में पर्वत राज हिमालय है तो दूसरी ओर दक्षिण में अथाह सागर लहरा रहा है। पश्चिम में रेगिस्तान का मरुस्थल है तो तो पूर्व में बंगाल की खाड़ी है। ये सभी इसकी स्थिति को बहुत ही मजबूत और प्रभावशाली बनाए हुए है। भारत में जगह-जगह पर्वत मालाएं , हरे भरे जंगल, हरे-भरे मैदान, रमणीय और दर्शनीय स्थल, सुन्दर समुद्र तट, देवालय हमारे चारों धाम आदि इसकी शोभा बढ़ा रहे हैं। उत्तर की तरफ जहां एक ओर स्वर्ग के रूप में कश्मीर है, तो दूसरी ओर दक्षिण में सागर की सुन्दरता , यहाँ अनगिनत सरिता बहती हैं जो अपने स्वरूप द्वारा इसको अनोखा और दिव्य स्वरुप प्रदान करती हैं।
ये भारत भूमि पर कल कल करती नदियाँ हर भारतीय के लिए माँ के समान पूज्यनीय और वन्दनीय है। ऊँची ऊंची पर्वत की चोटी भारत की शान में चार चाँद लगाती हैं और विश्व में अपना स्थान रखती हैं । हमारे भारत की सभ्यता संसार में सबसे प्राचीनतम है। इसकी पावन भूमि ने अनेकों सभ्यताओं और संस्कृतियों को जन्म दिया है। इसने केवल एक संस्कृति का पोषण नहीं किया बल्कि इसने अनेकों संस्कृतियों को आँचल की छाया में पाल-पोस कर महान संस्कृतियों के रूप में खड़ा किया है।हमारे इस भारतवर्ष की भूमि ने प्रभु राम और मन मोहन कृष्ण को ही जन्म नहीं दिया बल्कि बड़े बड़े नेताओं जैसे महात्मा गाँधी, लाल बहादुर शास्त्री, पंडित जवाहरलाल नेहरू, महान विभूतियों चन्द्र शेखर आजाद , सरदार बल्लभ भाई , भगत सिंह, पृथ्वीराज चौहान जैसे अनेकों शहीदों और महापुरूषों को जन्म दिया है, जिन्हें हम सदा सदा और शत शत नमन करते हैं ।हमारे प्रिय भारत में लाख विभिन्नता होते हुए भी एकता के दर्शन होते हैं। इस तरह से अपना ये भारत अनेकों गुणों से सज्जित है हम कह सकते हैं कि भारतवर्ष का स्वरूप जितना भव्य और विशाल है, चौड़ी छाती है , जो आततायियों का काल है , दुर्गा और चंडी का रूप है तो इसका मन उतना ही उन्नत, शहनशील , प्रेम से परिपूर्ण और उदार है।
हमारे प्रिय भारत में विभिन्न धर्म व जातियाँ साथ साथ रहते हैं तरह तरह की भाषाएँ एक दूसरे को दिलों से बांधे हुए हैं इन भाषाओँ में एक सुखद मिठास भरी है और सब एक दूसरे की भाषा को महत्त्व देते हैं और यहाँ अनगिनत भाषाएँ बोली जाती हैं। यहाँ की राज्यभाषा के रूप में एक तरफ हिन्दी को मान्यता प्राप्त है तो दूसरी तरफ हिन्दी, संस्कृत, मलयालम, मराठी, पंजाबी, बंगाली, गुजराती, तेलगु, तमिल, कन्नड़, आदि अनेकों भाषाओं का समावेश और संगम भी है । अनगिनत महापुरुषों ने इस पावन भू पर जन्म लिया है। यह देश विविध पावन स्थलों से भरा है।
इसका जितना भी गुण गान और बखान किया जाए कम हैं , आइये हम सब मिल इसकी शान को और बढायें , लिए तिरंगा चोटी पर चढ़ते जाएँ, ना घबराएं किसी की भृकुटी अगर इस देश पर उठे तो ऐसे गरजें की सब थर्राएँ ......अपनी संस्कृति अपनी पहचान ...वचपन से दे दें ये सीख ..आने वाली पीढ़ी को सुसंस्कृत कर ज्ञान दिलाएं ...और हम विश्व गुरु बन कर दिखलायें ....
हम यह गर्व से कह सकते हैं की यह एक तपस्थली है इसका हर रज कण , कण-कण पावन और पूजनीय है। हम सब को अपने भारत देश पर नाज है , गर्व है। अनेकता में एकता की छवि लिए इस भारत भूमि को मैं नत-मस्तक हो साष्टांग प्रणाम करता हूँ।
आइये हम प्रेम से बोलें ...
.जय हिन्द जय भारत
जय जवान जय किसान
और साथ साथ गा लें
“सारे जहाँ से अच्छा हिंदोस्तां हमारा,
हम बुलबुले हैं इसके, ये गुलिस्तां हमारा।।”
हमारे पिताश्री के ब्लॉग से उद्धरित ...
आप सब को ६७ वें स्वतंत्रता दिवस की मंगल कामनाएं ....सब शुभ हो ...
कविता शुक्ल
प्रतापगढ़ भारत
सुरेन्द्र कुमार शुक्ल 'भ्रमर ५'
वर्तमान-कुल्लू , हिमाचल
(प्रतापगढ़ भारत से )
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Thursday, 24 May 2012
मै खुश्बू हूँ मगन रहूँ मै
मै कविता मेरी दीदी के ब्लॉग से
आज आप सब के आशीष से हमें दोहरी ख़ुशी नसीब हुयी एक तो जन्म दिन पर आप सब का आशीष और भरपूर प्यार और दूसरी तरफ आज यू पी बी एड का परीक्षा फल घोषित हुआ जिसमे मै खुश्बू १७५५ वी रैंक हासिल कर सकी जितनी आशा थी नहीं कर पायी लेकिन घर परिवार आप सब का प्यार यों ही मिलता रहेगा तो इस समाज के लिए कुछ न कुछ रचनात्मक करूंगी ..
दीदी तुझे हार्दिक शुभ कामनाएं और आप के गुरु वृन्द को नमन
कविता
आज आप सब के आशीष से हमें दोहरी ख़ुशी नसीब हुयी एक तो जन्म दिन पर आप सब का आशीष और भरपूर प्यार और दूसरी तरफ आज यू पी बी एड का परीक्षा फल घोषित हुआ जिसमे मै खुश्बू १७५५ वी रैंक हासिल कर सकी जितनी आशा थी नहीं कर पायी लेकिन घर परिवार आप सब का प्यार यों ही मिलता रहेगा तो इस समाज के लिए कुछ न कुछ रचनात्मक करूंगी ..
आप सब का बहुत बहुत आभार ...बहुत आभारी हूँ मै अपने गुरुओं का , माँ पिता भाई बहन और आप सब का भी .....अब मंजिलों पर कदम बढ़ चले हैं ....हरी ओउम
खुश्बू
पुत्री आप सब के "भ्रमर" जी
मै खुश्बू हूँ मगन रहूँ मै
महकूँ मै महकाती जाऊं
तितली सी उडती जाती मै
बड़ी दूर तक देखो तुम्हे छकाये
मलयानिल संग घूम फिरूं मै
उड़ उड़ आती अपना पर फैलाये
मै खुश्बू हूँ........... मगन रहूँ मै
महकूँ मै महकाती जाऊं
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सुन्दर-सुन्दर पुष्प हमारे
जननी-जनक हैं न्यारे
भगिनी -भाई बड़े दुलारे
कोमल आँख के तारे
सभी ख़ुशी हैं उनको देखे
खिंचे चले ही आते
सुन्दर जब परिवेश हमारा
बगिया हरी भरी हो
प्रेम पुष्प जब खिलें ह्रदय तो
खुश्बू मन भर ही जाती
मै खुश्बू हूँ मगन रहूँ मै
महकूँ मै - महकाती जाऊं ….
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आनंदित जब मन हों अपने
दुनिया अच्छी लगती
गुल-गुलशन अपना खिल जाए
बात ये बिलकुल सच्ची
गले मिलें सौहार्द्र भरा हो
हर मन हर को प्यार भरा हो
सभी कृत्य अपने हों अच्छे
बिना चाह के -जैसे बच्चे
मगन रहूँ मै ... मै खुश्बू हूँ
मै खुश्बू हूँ मगन रहूँ मै
महकूँ मै - महकाती जाऊं ….
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मै खुश्बू हूँ सदा सुवासित
अन्तरंग तेरा महकाऊँ
रोम -रोम पुलकित कर तेरा
जोश -होश सारा दे जाऊं
अधरों पर मुस्कान खिलाती
खुशियों की बरसात कराती
मै खुश्बू हूँ ....
मै खुश्बू हूँ मगन रहूँ मै
महकूँ मै - महकाती जाऊं ….
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मेरे जन्म-दिवस पर आना
खुश्बू मन भर -भर ले जाना
अपने आशीर्वचन सुनाना
मै जीवंत रहूँ इस उपवन
सांस में तेरी सदा -सदा -'वन '
गाँव -शहर या गिरि कानन सब
दिल में तेरे बसी चलूँ मै
उन्नति पथ पर सदा उडाऊं
तितली सा मै रंग -बिरंगी
सपने तेरे सच कर जाऊं
इस घर उस घर जहां भी जाऊं
महकूँ मै महकाती जाऊं
मै खुश्बू हूँ मगन रहूँ मै
महकूँ मै - महकाती जाऊं ….
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सुरेन्द्र कुमार शुक्ल भ्रमर ५
२४.५.२०१२ कुल्लू यच पी
७-७.२६ पूर्वाह्न
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